बुद्ध वाणी.
“बुद्ध वह नहीं जो संसार छोड़ गया,
बुद्ध वह है जिसने भ्रम छोड़ दिया।”
बुद्ध वाणी.
“बुद्ध वह नहीं जो संसार छोड़ गया,
बुद्ध वह है जिसने भ्रम छोड़ दिया।”
!!! अंधविश्वास किसी पर मत करना
चाहे धर्म ग्रंथ हो या किसी महानुभाव का कहना
जब तक वो तुम्हारी अपनी बुद्धि और विवेक की
कसौटी पर खरा ना उतरे !!!
~ बुद्ध वाणी
!!! अज्ञान ही सारी विषमताओं की जड़ में है
अज्ञान न पूजा, न व्रत, न चढ़ावों से समाप्त होता है
अज्ञान केवल ध्यान से दूर होता है !!!
~ बुद्ध वाणी
!!! सौन्दर्य अनित्य है...........
इसलिए भाव बोध से मुक्त पुरुष,
न सुन्दरता से सम्मोहित होता है,
और न ही कुरूपता से विरक्त !!!
~ बुद्ध वाणी
!!! जिस क्षण तुम्हारे अंतर में ये भाव उत्पन्न हुआ
कि तुम पाप कर रहे थे,
उसी क्षण तुमने स्वयं अपनी मुक्ति के मार्ग पर
पहला पग धर दिया है !!!
~ बुद्ध वाणी
!!! सत्य के मार्ग पे चलते हुए दो भूल हो सकती हैं
पहला — पूरा रास्ता तय ना करना......
और दूसरा — उसे आरम्भ ही ना करना !!!
~ बुद्ध वाणी
!!! व्यक्ति का मन ही उसका सबसे बड़ा शत्रु है
जो उससे अनुचित कार्य करवाता है ......
हम जो सोचते हैं उसका ही परिणाम बनते हैं ......
अच्छा विचार अच्छा परिणाम देता है ......
बुरा विचार बुरा परिणाम ......
ये प्रकृति का नियम है ..... !!!
~ बुद्ध वाणी
!!! करुणा से ही हम दूसरे जीव की पीड़ा समझ सकते हैं
उसका दुःख दूर कर सकते हैं ....
हम कितनी भी पुण्य की बातें पढ़ लें, कह लें
जब तक वह आपके अपने कृत्य न बन जाए
तब तक कोई लाभ नहीं ...... !!!
~ बुद्ध वाणी
!!! आत्म मुक्ति के तीन चरण हैं.........
शीलाचार, ध्यान और ज्ञान।
शीलों का आचरण करने से ध्यान साधना बढ़ती है,
ध्यान साधना से ज्ञान का उदय होता है,
जिससे शीलों का गहन आचरण करना संभव होता है .....
इसी से हम लोभ, क्रोध और अज्ञान से मुक्त होकर
आत्म मुक्ति, शान्ति और आनंद की प्राप्ति कर सकते हैं.... !!!
~ बुद्ध वाणी
!!! जीवन का रहस्य है भय से मुक्त होना.........
कल क्या होगा.... तुम्हारा या मेरा क्या होगा.....
किसी पे निर्भर ना होना....
जैसे ही भय को अस्वीकार करोगे पूर्ण मुक्ति मिलेगी !!!
~ बुद्ध वाणी
!!! कितने भी धार्मिक ग्रन्थ पढ़ लो,
कितना ही उन्हें कंठस्थ कर लो....
यदि वो तुम्हारे जीवन के कृत्य ना बने
तो समझना कुछ भी नहीं किया... !!!
~ बुद्ध वाणी
!!! तीन सत्य हैं जिन्हें जन-जन तक पहुंचना है ........
उदार हृदय, दयालु वचन,
सेवा में अर्जित जीवन और करुणा.....
ये ही तीन मंत्र मानवता का नवनिर्माण करेंगे... !!!
~ बुद्ध वाणी
!!! मृत्यु का भय उसे ना होगा
जिसने अपना जीवन बुद्धिमानी से जीया हो .....
यह शरीर तो नश्वर है .... पर मेरी वाणी ....
मेरे सूत्र बन सदैव आप लोगों के पथ को प्रकाशमयी करेंगे !!!
~ बुद्ध वाणी
!!! धर्म और संघ हम सब के अंतर में है .....
जागने की क्षमता बुद्ध है........
जाग के जिस पथ पर चले वो धर्म है.....
और अपने पूरे मन को एकत्र करना संघ है .....
ये तीन रत्न हम सब के अंतर में ही हैं !!!
~ बुद्ध वाणी
!!! अप्प दीपो भवः — अपना दिया स्वयं बनना.......
अपने बुद्ध को पहचानो....... जागो और धर्म के मार्ग पे चलो ......
अपने अंतर के संघ को साधो....... अपनी शरण में जाना ........
किसी को ना खोजना ....... जो है सब अस्थिर है
उसके बीच स्थिर रहना ..... परिश्रम से निरंतर संघर्ष करना .......
कभी हार ना मानना !!!
~ बुद्ध वाणी
यदि परमज्ञान के मार्ग में कोई भी मिले, उसे गले मत लगाना।
यदि उस मार्ग में बुद्ध भी मिलें, तो उनके मोह में भी मत फँसना।
अपने जीवन को पूर्ण स्वेच्छा से जीना,
किसी के बंधन में मत जीना।
यदि तुम बुद्ध नहीं, तो तुम्हें बुद्ध में कोई रुचि नहीं होगी।
और यदि तुम्हें बुद्ध में रुचि है, तो तुम स्वयं बुद्ध हो।
“आनंद, दुखी मत हो।
मैं दुनिया में आने वाला न तो पहला बुद्ध था, न ही अंतिम।
आने वाले समय में एक और बुद्ध आएगा।
वह पवित्र होगा, बुद्धिमान होगा,
जो इंसानियत की मिसाल बनेगा।
मैंने जो अनंत सत्य की बातें बताई हैं,
वह भी बताएगा।
वह ऐसे धर्म का प्रचार करेगा,
जिसका आरंभ भी प्रकाश होगा और अंत भी।
वह ऐसा धार्मिक जीवन व्यक्त करेगा,
जो पूर्णतः पवित्र होगा।
मेरे शिष्य तो सैकड़ों में हैं,
पर उसके शिष्य असंख्य होंगे।”
बुद्धं शरणं गच्छामि।
धम्मं शरणं गच्छामि।
संघं शरणं गच्छामि॥
“मैं बुद्ध की शरण में जाता हूँ।
मैं धर्म की शरण में जाता हूँ।
मैं संघ की शरण में जाता हूँ।”
यहाँ —
बुद्धं → जाग्रत चेतना, बुद्धत्व, सत्य को जानने वाला
धम्मं → सत्य का मार्ग, धर्म, जीवन का सही आचरण
संघं → साधकों का समुदाय, या भीतर की एकाग्रता और सामंजस्य
यह समस्त संकलन “बुद्ध” धारावाहिक में प्रस्तुत संवादों, वचनों एवं दार्शनिक विचारों से प्रेरित है। इन्हें यहाँ केवल अध्ययन, मनन एवं वैचारिक चिंतन के उद्देश्य से संकलित एवं प्रस्तुत किया गया है। इस सामग्री पर मेरा किसी भी प्रकार का स्वामित्व, अधिकार अथवा मौलिक दावा नहीं है।